Google search engine
Homeविचारअब तो जाते हैं बुत-कदे से, फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया- मीर...

अब तो जाते हैं बुत-कदे से, फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया- मीर तकी मीर……

उर्दू शायरी में लोग सबसे ज्यादा को ही जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि उर्दू शायरी के सबसे पहले और बड़े शायर मीर तकी मीर हैं! उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ‘ ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है! द न्यूज़ वर्ल्ड मीर तकी मीर के द्वारा लिखी हुई कुछ बेहतरीन शायरी से रूबरू कराएगा!

1. पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है….

2. उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया,
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया……

3. अब तो जाते हैं बुत-कदे से ‘मीर’
     फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया……..

4. नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए,
      पंखुड़ी इक गुलाब की सी है…….

5. आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम,
     अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये…..

6. हम हुए तुम हुए कि ‘मीर’ हुए,
    उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए…….

7. कोई तुम सा भी काश तुम को मिले,
       मुद्दआ हम को इंतिक़ाम से है…….

8. शाम से कुछ बुझा सा रहता हूँ
     दिल हुआ है चराग़ मुफ़्लिस का……

9. उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर,
       शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का….

10. सख़्त काफ़िर था जिन ने पहले ‘मीर’
       मज़हब-ए-इश्क़ इख़्तियार किया…….

11. इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है,
      यानी अपना ही मुब्तला है इश्क़……

12. इक़रार में कहाँ है इंकार की सी सूरत,
   होता है शौक़ ग़ालिब उस की नहीं नहीं पर…..

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments