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और तो क्या था बेचने के लिए, हमने अपनी आंखों के ख़्वाब बेचे हैं

उर्दू शायरी इश्‍क़ से लबरेज़ है! यह जज्‍़बात का आईना है! कम शब्दों में बड़े ही खूबसूरती से अपनी बात कहने का सबसे अच्छा तरीका है! शुरुआती दौर से ही भारत और दुनिया में एक से बढ़कर एक शायर हुआ है! द न्यूज़ वर्ल्ड ऐसे ही कुछ शायरों और उनकी लिखी बेहतरीन शायरी से अपने दर्शकों से रूबरू कराता आया है और हमेशा कराता रहेगा! शायर हमेशा ख्वाबों की जिंदगी जीते हैं, इसलिए उन्होंने ख्वाबों पर भी खूब लिखा है!

और तो क्या था बेचने के लिए,
अपनी आंखों के ख़्वाब बेचे हैं

                              जौन एलिया

कहानी लिखते हुए दास्तां सुनाते हुए
वो सो गया है मुझे ख़्वाब से जगाते हुए

                                सलीम कौसर

इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का,
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का

                                   फ़ानी बदायूंनी

आशिक़ी में ‘मीर’ जैसे ख़्वाब मत देखा करो,
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो

                                       अहमद फ़राज़

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें,
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

                                       निदा फ़ाज़ली

ख़्वाब होते हैं देखने के लिए,
उन में जा कर मगर रहा न करो

                            मुनीर नियाज़ी

ये ज़रूरी है कि आंखों का भरम क़ाएम रहे,
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

                                      राहत इंदौरी

आंखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम,
उस को भी खो दिया जिसे पाया था ख़्वाब में

                                       सिराज लखनवी

रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को,
मैं जो सोता हूं तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी

                                जलील मानिकपुरी

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